किसी प्रवासी मजदूर या श्रमिक से न वसूला जाए घर जाने का किराया- सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़ पैंट्री डेस्क: कोरोना वायरस की वजह से देश में लगे लॉकडाउन के दौरान देश के प्रवासी मजदूरों की हालत बहुत खराब है, उनके दुर्दशा पर सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों से कोई बस या ट्रेन का किराया नहीं लिया जाएगा. मजदूरों को राज्य द्वारा भोजन प्रदान किया जाना चाहिए. और ट्रेनों में रेलवे द्वारा भोजन और पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि पैदल घर जा रहे प्रवासी श्रमिकों को तुरंत शेल्टर होम में ले जाया जाए और भोजन और सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया की जाएं. इसके अलावा कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को दी जा रही मदद पर सभी राज्यों को शुक्रवार (5 जून) तक जवाब दाखिल कर ब्योरा देने को कहा. इस पर फिर से शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी.

3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई

दरअसल प्रवासी मजदूरों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने 28 मई को सुनवाई की. केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार की ओर से 1 मई से 27 मई तक 3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई हैं,  जिनके द्वारा 95 लाख से ज्यादा श्रमिक यात्रियों का आवागमन हुआ है .हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि ट्रेन का किराया यात्रा शुरू करने या मंजिल वाले राज्य ने चुकाया है, श्रमिकों पर इसका कोई बोझ नहीं था. शुरुआत में जिन श्रमिकों ने किराया दे दिया था उनको बिहार सरकार ने भुगतान कर दिया है.

प्रवासी मजदूरों को शेल्टर होम में रखा जाए

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार सभी प्रवासी मजदूर यात्रियों का रजिस्ट्रेशन करे और उसके मुताबिक ही उनका ट्रेन में बैठना सुनिश्चित करे. इसके अलावा सड़क पर पैदल जाता कोई भी मजदूर दिखे तो उसे तुरंत शेल्टर होम में लाकर रखे फिर खाना-पीना देकर ट्रेन या बस से उसके गांव तक भेजने का इंतजाम करे.

 

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