देश के गरीब परिवारों को हर महीने 7,500 रुपये दे मोदी सरकार :विपक्ष

न्यूज पैंट्री डेस्क : देश में कोरोना वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. संक्रमित मरीजों की संख्या 1 लाख को पार कर चुकी है. साथ ही नए मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है. इस जानलेवा महामारी से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लागू है. इस बीच देश भर में प्रवासी मजदूरों के पलायन ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. इसे लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

कोरोना संकट और लॉकडाउन को लेकर देश के 22 विपक्षी दलों ने आपस में चर्चा की है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत कई बड़े दल इस चर्चा में शामिल रहे. देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति पर बातचीत करने के बाद इन दलों ने केंद्र की मोदी सरकार के सामने 11 मांगे रखी हैं. इनमें सबसे अहम मांग गरीब परिवारों के लिए नगद पैसे दिए जाने से जुड़ी रही.

पहली किस्त में दिए जाएं 10 हजार रुपये

चर्चा के बाद विपक्षी दलों ने एक साझा बयान जारी किया. इसमें सरकार से मांग की गई कि देश के गरीब परिवारों को हर महीने नगद पैसे दिए जाएं. ऐसे परिवार जो इनकम टैक्स नहीं देते हैं, सरकार उन्हें हर महीने साढ़े सात हजार रुपये देने की व्यवस्था करे. अगले छह महीने तक यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए. लॉकडाउन के कारण जो बेरोजगारी बढ़ी है उससे निपटने के लिए यह कदम जरूरी है.

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इन सभी पार्टियों ने सुझाव दिया है कि सबसे पहले गरीब परिवारों को 10 हजार रुपये दिए जाएं. इसके बाद अगले पांच महीनों तक बराबर किस्तों में यह राशि मजदूरों को पहुंचाई जाए. शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निमंत्रण पर वीडियो माध्यम से यह बैठक की गई. बैठक में सभी दलों ने एक सुर से आर्थिक पैकेज को नाकाफी बताया और साथ ही इसकी समीक्षा किए जाने की भी मांग उठाई.

इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल हुए. इसके अलावा कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने भी चर्चा में हिस्सा लिया. हालांकि, उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस चर्चा से दूर रहे.

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