कांग्रेस ने मणिपुर में लिया मध्य प्रदेश का बदला, संकट में भाजपा सरकार

न्यूज पैंट्री डेस्क : कोरोना संकट के बीच एक और राज्य में सियासी उठापटक देखने को मिली है. मध्य प्रदेश के बाद अब पूर्वोत्तर भारत के राज्य मणिपुर में सत्ताधारी दल की कुर्सी खतरे में आ गई है. एमपी में कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी थी और अब मणिपुर की भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार मुश्किलों में घिर गई है.

मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. साथ ही नेशनल पीपुल्स पार्टी यानी एनपीपी के चार विधायकों समेत कुल छह विधायकों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है. इसके चलते मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की अगुवाई वाली बीजेपी गठबंधन की सरकार गिरती दिख रही है.

अल्पमत में भाजपा सरकार

मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं. भाजपा गठबंधन के पास कुल 31 विधायकों का समर्थन था लेकिन अब 9 विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है. समर्थन वापस लेने वालों में एक तृणमूल कांग्रेस का और एक निर्दलीय विधायक शामिल है.

जानकारी के मुताबिक भाजपा के जिन तीन विधायकों ने कांग्रेस का दामन थामा है उनमें सुभाष चंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेंदाई का नाम शामिल है. ये तीनों विधायक मुख्यमंत्री से बेहद नाराज थे और इसीलिए उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ा है.

सरकार बनाने का दावा करेगी कांग्रेस

ताजा घटनाक्रम के बाद भाजपा के गठबंधन वाली सरकार अल्पमत में आ गई है. स्थिति को भांपते हुए कांग्रेस सक्रिय हो गई है. कांग्रेस अब विश्वास मत के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने की तैयारी कर रही है. कांग्रेस नेता और मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने मीडिया से बातचीत में इसके संकेत दिए.

इबोबी सिंह ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मौजूदा प्रदेश सरकार ने अपने सहयोगियों का समर्थन खो दिया है. इसे देखते हुए हमने एक सेकुलर प्रोग्रेसिव फ्रंट बनाने का प्रस्ताव रखा है. हम गुरूवार को एक साथ मिलकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.”

मणिपुर विधानसभा की ताजा स्थिति क्या है?

60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में अब सदस्यों की संख्या घटकर 49 रह गई है. दरअसल, कांग्रेस के सात विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का समर्थन दिया था. इन सातों विधायकों के खिलाफ अयोग्यता का मामला चल रहा है हाईकोर्ट ने इनके विधानसभा में प्रवेश पर रोक लगा दी है.

इसके अलावा कांग्रेस के ही एक और विधायक को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है. कुल मिलाकर अब तक कांग्रेस के आठ विधायक अयोग्य घोषित हो चुके हैं. बुधवार को भाजपा के जिन तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया है उन्हें भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है. अब विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 49 रह गई है.

मणिपुर में साल 2017 में विधानसभा चुनाव हुए थे. इस चुनाव में 28 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. हालांकि 21 सीटें जीतने वाली भाजपा ने कांग्रेस को चौंकाते हुए सहयोगी दलों के समर्थन से राज्य में पहली बार अपनी सरकार बना ली थी.

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