चीन से हुए समझौते को लेकर राहुल और सोनिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

न्यूज़ पैंट्री डेस्क: चीन की सत्ताधारी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के साथ कांग्रेस पार्टी के द्वारा वर्ष 2008 में हुए समझौते का केस देश की शीर्ष अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

25 जून यानि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई जिसमें सीपीसी के साथ कांग्रेस पार्टी के हुए समझौते को सार्वजनिक नहीं करने का मसला उठाते हुए उस समझौते की एनआइए या सीबीआइ से जांच कराए जाने की अपील की गई है.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका वकील शशांक शेखर झा और पत्रकार आइआर रोड्रिग्स ने दाखिल किया है. गौरतलब है कि याचिका में कांग्रेस पार्टी के अलावा सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी को भी प्रतिवादी बनाया गया है. इसके अलावा मामले में केंद्र सरकार भी प्रतिवादी हैं.

दायर याचिका में कहा गया है कि 07 अगस्त 2008 को यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस और सीपीसी के बीच बीजिंग में एक समझौता हुआ था जिसमें दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तरीय इनफारमेशन और कोआपरेशन एक्सचेंज का करार हुआ था.

कांग्रेस ने समझौते का ब्यौरा छुपाया

दाखिल याचिका में कहा गया है कि चीन के साथ खराब रिश्ते होने के बावजूद कांग्रेस ने गठबंधन सरकार में रहने के दौरान यह समझौता साइन किया था और देश से इस समझौते का डिटेल छुपाया और सार्वजनिक नहीं किया गया. चूंकि सूचना कानून राजनीतिक पार्टी पर लागू नहीं होता इसलिए समझौते की जांच एनआइए से कराई जाए या फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआइ इसकी जांच करे.

गौरतलब है कि वर्तमान में यह राजनीतिक मसला बना हुआ है जिस पर भाजपा लगातार कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रही है. सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर चीन को हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन समर्पित करने के हमले के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसके लिए कांग्रेस और सीसीपी के बीच हुए समझौते को जिम्मेदार बताया था.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया ट्वीट 

मंगलवार को जेपी नड्डा ने 2008 में कांग्रेस पार्टी और सीसीपी के बीच समझौते और उसके बाद मनमोहन सिंह सरकार और कांग्रेस के बदले रवैये से जुड़े फैसलों को ट्वीट किया.

जेपी नड्डा के अनुसार समझौते के बाद ही तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने चीन के सामने हजारों किलोमीटर जमीन समर्पित कर दी. जब डोकलाम हुआ तो राहुल गांधी भारत में चीनी राजदूत से मिलने चीनी दूतावास में चले गए. यह बात उन्होंने छुपाने की भी कोशिश की.

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