अब कोरोना से लड़ेगा दुनिया का सबसे तेज चलने वाला सुपर कम्प्यूटर

न्यूज पैंट्री डेस्क : दुनिया कोरोना वायरस के कारण हलकान है. इस वैश्विक महामारी की अब तक कोई काट नहीं मिल पाई है. यही वजह है कि इस वायरस ने लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया है. 90 लाख से ज्यादा लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं और हर दिन रिकॉर्ड संख्या में नए मामले दर्ज हो रहे हैं.

इस वायरस का इलाज ढूंढने के लिए दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ जुटे हुए हैं. वैक्सीन पर भी तेजी से काम किया जा रहा है. अब कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में दुनिया के सबसे तेज कम्प्यूटर का भी तैनात किया गया है. जापान का फुगाकू नाम के सुपर कम्प्यूटर को इस लड़ाई में उतारा गया है. फुगाकू कम्प्यूटर को सोमवार को ही दुनिया के सबसे तेज कम्प्यूटर होने का दर्जा मिला है.


दुनिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर ‘फुगाकू’

फुगाकू कम्प्यूटर दुनिया का सबसे तेज सुपरफास्ट सुपर कम्प्यूटर है. ये अमेरिका की आईबीएम मशीन की तुलना में हर सेकंड 2.8 गुना ज्यादा कैलकुलेशन कर लेता है. इसका मतलब हुआ कि अमेरिका की आईबीएम मशीन जितनी गणना करती है, फुगाकू प्रत्येक सेकंड में उससे ढाई गुने से भी ज्यादा गणना करता है. अमेरिका की आईबीएम मशीन को समिट सुपर कम्प्यूटर कहा जाता है. दुनिया के टॉप-500 सुपर कम्प्यूटर की लिस्ट में यह चार बार पहले स्थान पर रह चुका था.

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जापान के फुगाकू ने अब सबको पीछे छोड़ दिया है. इस जीत के साथ ही जापान ने सुपर कम्प्यूटर के क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे अमेरिका और चीन के वर्चस्व को तोड़ दिया है. ग्यारह साल के लंबे इंतजार के बाद जापान ने इस लिस्ट को टॉप किया है. दरअसल, टॉप-500 की इस लिस्ट में दुनिया के सबसे ताकतवर सुपर कम्प्यूटर को जगह मिलती है.


फुगाकू की अहम बातें

जानकारी के अनुसार अगले साल तक यह कम्प्यूटर पूरी तरह से काम करने लायक हो जाएगा. जानकारों की मानें तो इस मशीन से कोरोना वायरस का इलाज खोजने में काफी मदद मिलेगी. पूरे एक कमरे के आकार की इस मशीन को जापान के कोब शहर में रखा गया है. जापानी टेक्नॉलॉजी फर्म फुजित्सु और सरकारी संस्थान राइकेन इंस्टीट्यूट ने इसे छह साल में तैयार किया है. फुगाकू का नाम माउंट फुजी पर्वत से लिया गया है.

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जापान फुगाकू को पहले से ही कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई में इस्तेमाल कर रहा है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छींकने या खांसने से निकलने वाली कफ की बूंदें किस तरह से दफ्तरों या खिड़कियों वाली ट्रेनों में फैल सकता है. मतलब ये कि कोरोना वायरस भीड़भाड़ वाली जगहों पर किस तरह से फैल सकता है, इसे पता लगाने के लिए फुगाकू का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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