भारत में इन 8 दवाओं से ठीक हुए Corona के सबसे ज्यादा मरीज, जानिए नाम

न्यूज़ पैंट्री डेस्क: विश्वभर में कोरोना वायरस की वैक्सीन की खोज लगातार जारी है पर अभीतक कोई सटीक वैक्सीन नहीं बन सका है. देश में भी कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि यहां कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या अच्छी है. भारत में अभीतक 1.5 लाख के करीब कोरोना मरीज ठीक हो चुके हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों का किन दवाओं और थेरेपी से इलाज किया जा रहा है-

रेमडेसिवीर

रेमडेसिवीर एक एंटीवायरल दवा है, जिसे सर्वप्रथम 2014 में इबोला की रोकथाम के लिए किया गया था. WHO के ट्रायल में इस दवा को कोविड-19 के कारगर इलाजों में से एक माना गया है. गत माह, अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिजीज ने अपने शुरुआती ट्रायल के आधार पर दावा किया था कि रेमडेसिवीर देने वाले कोरोना के मरीजों में 11 से 15 दिनों तक में सुधार हुआ है. जिसके मद्देनजर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 1 जून को रेमडेसिवीर के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी. अब मौजूदा वक्त में गंभीर रूप से बीमार कोरोना के मरीजों को डॉक्टरों की तरफ से ये दवा दी जा रही है.

फेवीपिरवीर

फेवीपिरवीर एक एंटीवायरल है जो वायरस रेप्लिकेशन की रोकथाम के लिए दी जाती है. इसे एंटी-इन्फ्लूएंजा दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है. इस दवा को सर्वप्रथम जापान की फ्यूजीफिल्म टोयामा केमिकल लिमिटेड ने ईजाद किया था. भारत में फेवीपिरवीर को ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स और स्ट्राइड्स फार्मा को बनाने की मंजूरी मिली है.

टोसिलीज़ुमाब

टोसिलीज़ुमाब एक इम्यूनो सप्रेसेंट दवा है जिसे आमतौर पर गठिया रोग के इलाज के दौरान दी जाती है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, मुंबई में, कोरोना वायरस के 100 से अधिक गंभीर मरीजों का इलाज इस दवा से किया गया है. इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में ये दवा मुफ्त में दी जा रही है. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इस पर कोई भी डेटा देना अभी जल्दबाजी होगी.

इटोलीजुमैब

इटोलीजुमैब दवा ज़्यादातर त्वचा के रोगों जैसे सोरायसिस, रुमेटॉयड आर्थराइटिस, मल्टीपल स्केलेरोसिस और ऑटोइम्येन रोगों को ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है. भारत में, बायोकॉन कंपनी ने इसे 2013 में लॉन्च किया था. मौजूदा वक्त में दिल्ली और मुंबई में कोरोना के मामूली से लेकर गंभीर मामलों में ये दवा ट्रायल के तौर पर दी जा रही है, जिसके शुरुआती नतीजे जुलाई माह में आएंगे.

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन

कोरोना वायरस पर इस एंटी मलेरिया ड्रग ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के प्रभाव को लेकर पूरी दुनिया में बहस जारी है. द लैंसेट में छपी एक अध्ययन के बाद WHO ने इसका सॉलिडैरिटी ट्रायल रोक दिया था. हालांकि स्टडी के लेखकों द्वारा इसे वापस लेने के बाद ट्रायल को फिर से शुरू कर दिया गया है. भारत हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है. कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले मरीजों जैसे सिर दर्द, बुखार, बदन दर्द से लेकर गंभीर मरीजों को डॉक्टर ये दवा दे रहे हैं. ICMR के मुताबिक, 9 दिनों तक इसकी कम खुराक दी जा सकती है. हालांकि इसके साइड इफेक्ट्स को देखते हुए इसका प्रयोग अब कुछ मरीजों पर ही किया जा रहा है.

डॉक्सीसाइक्लिन+आइवरमेक्टिन

डॉक्सीसाइक्लिन और आइवरमेक्टिन, दोनों दवाओं के मिश्रण से कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज किया जा रहा है. मई के मध्य में, बांग्लादेश मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक अध्ययन में पाया गया कि इस मिश्रण से कोरोना वायरस के 60% मरीज ठीक हो गए थे. मोनाश बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टीट्यूट की अध्ययन से भी ये पता चला है कि आइवरमेक्टिन वायरस को 48 घंटों में खत्म करता है.

रिटोनावीर+लोपिनावीर

रिटोनावीर और लोपिनावीर एंटीवायरल को आमतौर पर एचआईवी के मरीजों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. सॉलिडैरिटी ट्रायल में इनकी जांच की जा रही है. कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ये दवाएं कोरोना के मरीजों के मृत्यु दर को कम करती हैं जबकि कुछ अध्ययन में यह दावा किया गया है कि मरीजों पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिलता है.

प्लाज्मा थेरेपी

प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के शरीर से लिए गए प्लाज्मा को कोरोना से पीड़ित मरीजों के शरीर में डाला जाता है जिससे, उस मरीज के शरीर में कोरोना से लड़ने की एंटीबॉडी बन जाती है. दिल्ली के कुछ अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल जारी है. कुछ अस्पतालों नें अपने ट्रायल में इस थेरेपी को मरीजों पर काफी असरदार बताया है.

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