भारत में कोरोना का इलाज कैसे हो रहा है, मरीजों को कौन सी दवाएं दी जा रही हैं?

न्यूज पैंट्री डेस्क: भारत में कोरोना वायरस महामारी विकराल होती जा रही है. संक्रमित मरीजों का आंकड़ा  सवा तीन लाख तक जा पहुंचा है और मरने वालों की संख्या 9 हजार को पार कर चुकी है. परेशानी की बात यह है कि रोजाना रिकॉर्ड संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं. सूरत-ए-हाल ये है कि अब भारत दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश बन गया है. सिर्फ अमेरिका, ब्राजील और रूस में ही भारत से अधिक संक्रमण के मामले हैं.

दुनिया में लाखों लोगों की जान लील चुकी इस महामारी का अब तक कोई कारगर इलाज नहीं मिल पाया है. अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीके से कोविड-19 के मरीजों का इलाज किया जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ की ओर से करीब आधा दर्जन दवाओं का ट्रायल किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत ने कोरोना के इलाज के लिए किन दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी दी है?


कोरोना मरीजों को दी जाएगी रेमेडेसिविर

अभी तक भारत में कोविड-19 संक्रमण के इलाज के लिए कई दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा था. अब भारत ने खास समूहों के कोरोना मरीजों के इलाज के लिए रेमेडेसिविर, टोसिलीजुनाब और प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है. इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संक्रमण के लक्षणों में भी बदलाव किया है. अब कोरोना के लक्षणों में स्वाद और गंध को भी शामिल कर लिया गया है.

कोरोना के इलाज के लिए दुनिया भर में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के अलावा जिस दवाई की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है वो रेमेडेसिविर है. रेमेडेसिविर एक एंटी वायरल दवाई है जिस कैलिफोर्निया की बायोफार्मा कंपनी गिलिएड साइंस ने तैयार किया था. इबोला के इलाज के लिए इसे बनाया गया था. कोविड-19 के इलाज में भी इसका ट्रायल किया गया और दुनिया भर में अलग-अलग नतीजे रहे.


टोसिलीजुनाब और प्लाजमा थेरेपी से कोरोना का इलाज

एक जून को भारत की टॉप ड्रग रेग्युलेटरी बॉडी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना के इलाज में रेमेडेसिविर के इस्तेमाल की अनुमति दी थी. इसके अलावा जो दूसरी दवाई है उसका नाम टोसिलीज़ुनाब है. कोरोना के इलाज में इसका इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी गई है. अब तक इस दवा का इस्तेमाल गठिया के इलाज में किया जाता रहा है. कुछ रिसर्च के मुताबिक कोरोना के मरीजों पर भी इसका अच्छा असर हो रहा है.

टोसिलीजुनाब को भारत में रोचे फार्मा कंपनी बनाती है. भारत में एक्टेमरा ब्रैंड नाम से इसकी बिक्री होती है. स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की निगरानी में कोरोना के मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया. मुंबई में भी कुछ मरीजों को यह दवा दी गई है. तीसरी और आखिरी चीज प्लाजमा थेरेपी है, जिसकी खूब चर्चाएं हो रही हैं. इसमें ठीक हो चुके कोरोना मरीज का प्लाजमा नए मरीज को दिया जाता है. दिल्ली में इस थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज किया गया है लेकिन नतीजे उतने उत्साहजनक नहीं रहे हैं.

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