EMI पर छूट, लेकिन ब्याज में छूट क्यों नहीं? के मामले में RBI ने Supreme court में दिया जवाब, पढ़ें पूरी खबर !

न्यूज़ पैंट्री डेस्क: कोरोना महामरी संकट के मध्य EMI में मोहलत देने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 4 जून  को सुनवाई की. इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्थिक पहलू लोगों के स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सामान्य समय नहीं हैं. एक तरफ ईएमआई पर समय दी जा रही है लेकिन ब्याज में कुछ भी नहीं जो कि अधिक हानिकारक है. सुप्रीम कोर्ट नें वित्त मंत्रालय को एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

EMI पर ब्याज को लेकर कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से मांगा जवाब

बता दें कि सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से जब पूछा कि क्या मोहलत के दौरान EMI पर ब्याज से और ब्याज पर ब्याज से  राहत प्रदान की जा सकती है तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे वित्त मंत्री और शीर्ष अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रास्ता तलाशेंगे. गौरतलब है कि इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी. तो वहीं सुप्रीम कोर्ट में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा है कि लोन चुकाने पर रोक के दौरान ब्याज पर छूट से बैंकों की वित्तीय स्थिरता और स्वास्थ्य को खतरा होगा.

बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए का होगा नुकसान….

दरअसल आरबीआई ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर 6 महीने की मोराटोरियम (मोहलत) अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग को गलत बताया. RBI ने कहा कि लोगों को 6 महीने का EMI अभी न देकर बाद में देने की राहत प्रदान की गई है लेकिन इस अवधि के दौरान का अगर ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा. क्योंकि बैंकों व वित्तीय संस्थानों के लिए ब्याज ही आय का स्त्रोत है.

लोन पर ब्याज लगाना गैर कानूनी…

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर, RBI ने 27 मार्च को एक सर्कुलर जारी बैंकों को 3 महीने की अवधि के लिए किश्तों के भुगतान के लिए मोहलत दी गई थी. फिर 22 मई को बैंक ने 31 अगस्त तक के लिए 3 महीने की मोहलत की अवधि बढ़ाने की घोषणा की, जिससे यह 6 महीने की मोहलत बन गई. परिणामस्वरूप लोन पर ब्याज 6 महीने के लिए बढ़ गया. इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा गया कि बैंक EMI पर मोहलत देने के साथ-साथ पैसे पर जो ब्याज दर है वह भी लगा रहे हैं जो गैर कानूनी है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था.

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