कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने वो कर दिखाया जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद कभी नहीं हुआ

न्यूज पैंट्री डेस्क : इस साल के शुरूआत से ही दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है. लगातार बढ़ते संक्रमण के मामलों की वजह से यह लड़ाई लंबी होती जा रही है. तमाम देशों ने इस खतरनाक महामारी पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया है. आलम यह है कि दुनिया के सबसे ज्यादा विकसित और आबादी वाले देश महीनों से बंद पड़े हैं.

सभी औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं और अर्थव्यवस्थाएं चरमरा गई हैं. करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है और लाखों लोग खाने-पीने का सामान भी नहीं जुटा पा रहे हैं. इस बीच एक अच्छी खबर भी आई है. महीनों से जारी ग्लोबल लॉकडाउन की वजह से पर्यावरण में ऐतिहासिक सुधार देखने को मिला है.

कार्बन उत्सर्जन में 17 प्रतिशत की गिरावट

नेचर क्लाइमेट नाम की एक ग्लोबल पत्रिका है जिसमें दुनिया भर के पर्यावरण विशेषज्ञों की रिसर्च और खोजों के बारे में जानकारी प्रकाशित की जाती है. इस पत्रिका में कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर एक रिपोर्ट छपी है. रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से धरती पर कार्बन की मात्रा में 17 प्रतिशत की कमी आई है.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में लॉकडाउन है जिसका बेहतरीन परिणाम सामने आया है. खुश होने वाली बात यह है कि पिछले सिर्फ एक महीने में ही कार्बन के उत्सर्जन में 17 फीसदी गिरावट दर्ज हुई है. इससे भी ज्यादा खास बात यह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार कार्बन उत्सर्जन में इतनी बड़ी गिरावट हुई है.

इससे होगा क्या ?

जिस टीम ने यह रिसर्च की है उसका कहना है कि कार्बन उत्सर्जन में हुई इस कमी से आम लोगों की जिंदगी पर भी असर पड़ेगा. लोगों को पहले से ज्यादा साफ और अच्छा मौसम मिलेगा. साथ ही कुछ वक्त के लिए ही सही लेकिन जलवायु परिवर्तन के लिहाज से भी यह अच्छी खबर है.

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इसका मतलब हुआ कि प्रदूषण का स्तर गिर गया है और इसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन पर भी पड़ेगा. ये तो हुई खुश होने वाली बात लेकिन वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस गिरावट से हमें अपनी पीठ नहीं थपथपानी है. कार्बन उत्सर्जन में यह कमी थोड़े समय के लिए हुई है. यह कमी समुद्र में एक बूंद के समान होगी.

प्रदूषण का स्तर 4-7 प्रतिशत

रिसर्च टीम ने आकलन किया है उसके मुताबिक लॉकडाउन के कारण प्रदूषण का स्तर कम हो रहा है. इस साल यह चार से सात प्रतिशत के बीच रहेगा, जो कि बीते साल की तुलना में कम है. अगर दुनियाभर में पूरे साल लॉकडाउन रहता है तो प्रदूषण के स्तर में सात प्रतिशत तक की कमी आएगी.

यह रिपोर्ट कहती है कि अप्रैल महीने में केवल एक सप्ताह के दौरान ही अमेरिका ने कार्बन उत्सर्जन के स्तर में एक तिहाई की कमी की है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है. फरवरी में चीन ने कार्बन प्रदूषण में करीब एक चौथाई तक कटौती की जबकि भारत और यूरोप ने 26 और 27 प्रतिशत तक की कटौती की है.

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