कोरोना रोकने के लिए मोदी ने जो टीम बनाई थी, उसने उनकी सरकार को ही फेल बता दिया

अमिताभ राय, न्यूज पैंट्री : दुनिया भर में कोरोना के खिलाफ जंग जारी है. भारत में भी हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं. आलम ये है कि देश में कोविड-19 संक्रमित मरीजों का आंकड़ा अब 1 लाख 90 हजार के पार जा चुका है. लॉकडाउन 4.0 की शुरूआत में संक्रमण का जो आंकड़ा 1 लाख के करीब था, वो बढ़कर अब करीब 2 लाख तक पहुंच गया है. इसका मतलब हुआ कि 18 मई से 1 जून तक मरीजों का आंकड़ा डबल हो गया है.

1 जून से देश में लॉकडाउन का पांचवा चरण भी शुरू हो गया है लेकिन संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है. इस बीच कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए बनाई गई नेशनल टास्क फोर्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. पत्र में टास्क फोर्स के विशेषज्ञों ने संक्रमण से निपटने के तरीकों को लेकर सरकार के रवैये की आलोचना की है. टीम की ओर से कहा गया है कि अगर भारत सरकार ने शुरुआत में ही संक्रमण विशेषज्ञों की राय ली होती तो हालात पर ज्यादा प्रभावी तरीके से काबू पाया जा सकता था.


पत्र में क्या लिखा है ?

25 मई को मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी तीन नामी संस्थाओं एम्स, बीएचयू और जेएनयू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. इन तीनों संस्थानों ने कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा जाहिर कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में डॉ डीसीएस रेड्डी भी शामिल हैं. डॉ रेड्डी कोरोना वायरस पर रिसर्च के लिए बनाई गई कमेटी के प्रमुख हैं.

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इन संस्थाओं ने कहा है कि बिना सोचे समझे और बिना समय दिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया. इसकी वजह से देश के लोग मानवीय त्रासदी और महामारी के फैलाव जैसी भारी क़ीमत अदा कर रहे हैं. बेहद सख़्त तालाबंदी के बावजूद न सिर्फ़ कोरोना के मामले दो महीने में 606 से बढ़कर 1 लाख 48 हज़ार से अधिक हो गए हैं बल्कि अब ये ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ की स्टेज पर है. हालांकि, भारत सरकार महामारी के कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज पर पहुंचने की बात से इनकार करती रही है.


भारत में कोरोना वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन !

बयान में कहा गया है कि सरकार ने सिर्फ़ चार घंटे की मोहलत देकर लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी. इसकी वजह से प्रवासी मज़दूरों और ग़रीबों को काफ़ी तकलीफ़ उठानी पड़ी. लॉकडाउन के कारण कम से कम 90 लाख दिहाड़ी मज़दूरों की रोजी-रोटी छिन गई है. लॉकडाउन को क्रूर बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा है कि ये सोचना कि इस स्तर पर अब कोरोना वायरस पर काबू पा लिया जा सकेगा हकीकत से परे होगा. अब भारत के कई कलस्टर में वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन होने लगा है.

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पीएम को लिखे पत्र में कहा गया है कि यदि इस महामारी की शुरुआत में ही, जब संक्रमण की रफ्तार कम थी, मजदूरों को घर जाने की अनुमति दे दी गई होती तो मौजूदा हालत से बचा जा सकता था. ऐसा इसलिए क्योंकि शहरों से लौट रहे मजदूर अब देश के कोने-कोने में संक्रमण ले जा रहे हैं और ग्रामीण इलाकों में इस वजह से ऐसा कोरोना विस्फोट होगा, जिस पर काबू पाना बेहद ही मुश्किल हो जाएगा. बता दें कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कोविड-19 से निपटने के लिए राष्ट्रीय टास्क फ़ोर्स के गठन का ऐलान किया गया था.

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