WHO छोड़ने पर बोला चीन- अमेरिका को भागने की पुरानी आदत है

न्यूज पैंट्री डेस्क : कोरोना वायरस संकट के बीच अमेरिका और चीन के बीच की रार थमती नहीं दिख रही है. अमेरिका चीन पर कोविड-19 संक्रमण को लेकर जानकारियां छिपाने का आरोप लगा रहा है. साथ ही अमेरिका ने चीन के दवाब में काम करने का आरोप लगाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ (WHO) से भी खुद को अलग कर लिया था. चीन ने अब इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप चीन पर लगातार हमला बोल रहे हैं. वो कोरोना वायरस को सार्वजनिक रूप से चाइनीज वायरस कहते नजर आते हैं और इस महामारी के लिए चीन को ही जिम्मेदार ठहराते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने डब्लूएचओ (WHO) पर लगातार सवाल खड़े किए. उन्होंने पिछले सप्ताह डब्लूएचओ (WHO) को छोड़ने की चेतावनी दी थी. शुक्रवार को बाकायदा उन्होंने इससे अलग होने का ऐलान कर दिया.

WHO छोड़ना अमेरिका की एकतरफा सोच

अमेरिका के डब्लूएचओ (WHO) छोड़ने पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के इस फैसले से उनकी पावर ऑफ पॉलिटिक्स और एक तरफा सोच का पता चलता है. चीनी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि इस तरह फैसले लेना अमेरिका के स्वार्थ को दर्शाता है. इससे पहले भी वह कई बार ऐसे फैसले कर चुके हैं. अमेरिका की भागने की यह आदत काफी पुरानी है.

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चीन ने इस मुद्दे पर अंतराराष्ट्रीय समुदाय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लिए समर्थन बढ़ाने की अपील की है. चीन ने कहा कि अमेरिका के जाने से महामारी के खिलाफ जंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके लिए सभी देशों को एकजुट होकर आगे आना होगा और डब्लूएचओ (WHO) को मजबूत करने के लिए काम करने की जरूरत है.

अमेरिका ने क्यों छोड़ा WHO ?

बता दें कि शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका डब्लूएचओ (WHO) के साथ अपने सारे रिश्ते खत्म कर रहा है. ट्रंप ने दलील दी थी कि यह अंतरराष्ट्रीय एजेंसी कोरोना वायरस महामारी को रोकने में बुरी तरह असफल रही है. डोनल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर चीन का पूरा नियंत्रण है. चीन के दवाब में आकर ही डब्लूएचओ (WHO) सही फैसले नहीं ले रहा है.

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