अमेरिका में अपने ही नागरिकों के खिलाफ ट्रंप को सेना क्यों उतारनी पड़ गई ?

न्यूज पैंट्री डेस्क : अफ्रीकी मूल के अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद हो रहे प्रदर्शनों से निबटने के लिए अमरीका के कई शहरों में कर्फ्यू लगाया जा रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वॉशिंगटन में कर्फ़्यू को सख़्ती से लागू किया जाएगा.

वॉशिंगटन में स्थानीय समयानुसार 11 बजे से कर्फ़्यू लागू होना था लेकिन मेयर ने इसे अब शाम सात बजे से ही लागू कर दिया है. वहीं न्यू यॉर्क के मेयर ने भी रात्रि के कर्फ़्यू की घोषणा की है. इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी कहा है कि हिंसा को रोकने के लिए वो हज़ारों पुलिसकर्मियों और सैनिकों को तैनात करेंगे.

बीते एक सप्ताह से अमरीका के कई शहरों में हिंसा, आगजनी और लूटमार की घटनाएं हो रहीं हैं. व्हाइट हाऊस से टीवी पर भाषण देने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ पास ही के एक चर्च में गए. इस चर्च को प्रदर्शनकारियों ने नुकसान पहुंचाया है. व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन को पुलिस ने ख़त्म कर दिया है.


इसी बीच परिवार की ओर से कराए गए जॉर्ज फ़्लॉयड के पोस्टमॉर्टम में उनकी मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी बताई गई है. परिवार की ओर से जॉर्ज फ़्लॉयड का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि ‘गले और कमर पर दबाव पड़ने’ की वजह से उनकी मौत हुई.

मिनियापोलिस पुलिस के अधिकारी ने कई मिनट तक फ़्लॉयड की गर्दन को घुटने से दबाए रखा था. परिवार की ओर से कराए गए इस पोस्टमॉर्टम के नतीजे सरकारी पोस्टमॉर्टम के नतीजों से अलग हैं. काउंटी मेडिकल एग्ज़ामिनर की ओर से कराए गए पोस्टमार्टम में गला दबाए जाने या ऑक्सीजन की कमी होने की पुष्टि नहीं की गई थी. आधिकारिक पोस्टमार्ट में उनकी मौत को होमीसाइड या हत्या कहा गया है.


इसी बीच जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन अमरीका के कई शहरों में फैल गए हैं. वॉशिंगटन में तो प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर भी इकट्ठा हो गए. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया. लगातार छठे दिन अमरीका के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह काफ़ी हिंसा हुई.

क़रीब 40 शहरों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है, लेकिन लोगों ने इसकी अनदेखी की और सड़कों पर उतर आए. इस कारण तनाव काफ़ी बढ़ गया है. न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजेलेस में दंगा पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष हुआ. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रांतीय गवर्नरों को चेतावनी देते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों से सख़्ती से निबटा जाए.

एक वीडियो कांफ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि हाल के दशकों की सबसे ख़राब नस्लीय और नागरिक अशांति की कुछ घटनाओं पर गवर्नरों की प्रतिक्रिया कमज़ोर रही है. ट्रंप ने कहा था कि गवर्नर हिसंक प्रदर्शनों पर हावी हों. ट्रंप के इस बयान पर विवाद होने के बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा है कि इस बयान का ग़लत मतलब निकाला जा रहा है.


ट्रंप की प्रवक्ता केयली मैकइनैनी ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के कहने का मतलब ये था कि गवर्नर नेशनल गार्ड पर ज़्यादा निर्भर रहें. राष्ट्रपति ट्रंप ने हिंसा के लिए वामपंथी कट्टरपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. वहीं आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं.

न्यू यॉर्क में लूटमार और संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाए जाने की घटनाओं के बाद गवर्नर एंड्र्यू क्यूमो और मेयर बिल डे ब्लासियो ने कर्फ़्यू लगा दिया है. ये कर्फ़्यू स्थानीय समयानुसार कल रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक रहेगा. अधिकारियों का कहना है कि नुकसान को रोकने के लिए पुलिस की मौजूदगी को दोगुना किया जाएगा.


क्यूमो ने कहा, “मैं प्रदर्शनकारियों और उनके संदेश के साथ खड़ा हूं लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसे लोग भी हैं जो इस अभियान को बदनाम करने का मौका तलाश रहे हैं.” क्यूमो ने कहा कि हिंसा से इस अभियान का मक़सद कमज़ोर हो रहा है. वहीं मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने मिनियोपोलिस और सैंट पॉल शहरों में मंगलवार के लिए कर्फ़्यू लगा दिया है. ये रात दस बजे से सुबह चार बजे तक लागू रहेगा.

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