नक्शा विवाद पर नेपाल ने पीछे खींचा कदम, जानिए क्या है वह बड़ी वजह !

न्यूज़ पैंट्री डेस्क: भारत के अभिन्न इलाकों को अपना बताकर नया नक्शा प्रकाशित करने वाले पड़ोसी मुल्क नेपाल ने इस मामले पर अपना कदम पीछे खीच लिया है. दरअसल मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, नेपाल में नए नक्शे को अपडेट करने को संविधान में संशोधन करने लिए आज होने वाली निर्धारित बैठक टाल दी गई. इसके साथ ही नेपाल की प्रतिनिधि सभा में संशोधन के लिए संसद में निर्धारित चर्चा भी आज टाल दिया गया. पार्टियों ने इस मसले पर राष्ट्रीय सहमति लेने का फैसला किया है. गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने ऐन मौके पर संसद की कार्यसूची से आज संविधान संशोधन की कार्यवाही को टाल दिया.

संविधान संशोधन के लिए बहुमत की जरूरत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल के प्रतिनिधि सभा में संशोधन के लिए संसद में चर्चा आयोजित करने के लिए आज का दिन निर्धारित किया गया था. लेकिन देश के राजनीतिक दलों ने इस मसले पर राष्ट्रीय सहमति बनाए जाने का फैसला किया. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 26 मई को नए नक्शे के मामले पर राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन कुछ अन्यक रिपोर्टों की मानें तो राजनीतिक दलों में इस मसले पर एक राय नहीं बन पाई. विदित हो कि नेपाल में किसी भी संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है.

 क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि बीते दिनों पड़ोसी देश नेपाल की सरकार ने अपने देश का नया नक्शा जारी किया था, जिसमें उसने भारतीय इलाके लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर को अपना बताया था. नेपाल सरकार ने ऐलान किया किया था कि इस नक्शे को अब देश के सभी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में इस्तेामाल किया जाएगा.

नेपाल के नए नक्शे को लेकर भारत ने जताया था विरोध

नेपाल के नए नक्शे में भारतीय इलाकों को नेपाल में दिखाए जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी. इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि हम नेपाल सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह ऐसी बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचे और भारत की एकता अखंडता का सम्मान करे. उन्होंने आगे कहा कि नेपाल सरकार इस मामले में भारत की स्थिति से पूरी तरह से वाकिफ है इसलिए नेपाल सरकार अपने फैसले पर फिर से विचार करे.

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