भारत और चीन में से रूस किसका साथ दे रहा है?

न्यूज पैंट्री डेस्क : इन दिनों भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. नेपाल के साथ सीमा विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है. पाकिस्तान के साथ हमेशा की तरह ही भारत के रिश्ते बुरी स्थिति में हैं. पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के साथ भी तनाव जारी है. एक सप्ताह पहले यह तनाव हिंसक झड़प में बदल गया और एक कमांडर समेत 20 भारतीय जवानों की जान चली गई थी.

अब भारत कूटनीतिक स्तर पर चीन से निपटने की तैयारी कर रहा है. साथ ही सैन्य स्तर पर बातचीत से भी मामले को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं. अमेरिका ने इस मामले में भारत के पक्ष में बयान दिया है. अब सवाल उठता है कि वैश्विक महाशक्ति माना जाने वाला रूस चीन और भारत में से किसके साथ खड़ा है?

राजनाथ सिंह का रूस दौरा

भारत के लिए यह सवाल और भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अतीत में जब भी मुश्किल आई है रूस ने भारत का साथ दिया है. ताजा हालातों को देखते हुए पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि रूस भारत को एकतरफा समर्थन दे सकता है. पिछले एक दशक में दुनिया के समीकरण बदले हैं और चीन का रुतबा बढ़ा है. रूस भी चीन की बढ़ती वैश्विक ताकत से अनजान नहीं है. ऐसे में रूस के लिए भारत का समर्थन करना आसान नहीं होगा.

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फिलहाल चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिन की रूस यात्रा पर गए हैं. इस यात्रा के दौरान वे रूस के उच्च सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे. साथ ही दूसरे विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर सोवियत विजय की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली भव्य सैन्य परेड में भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि वे रूस से चीन पर दवाब बनाने के लिए कहेंगे.

भारत-रूस सैन्य संबंध

कोविड-19 महामारी के कारण पिछले चार महीने से अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध था. उसके बाद से अब तक किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब लद्दाख में चीन के साथ भारत का गतिरोध बरकरार है. कई दौर के बातचीत के बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा है.

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सोमवार को मॉस्को रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा कि “तीन दिन की यात्रा पर मॉस्को रवाना हो रहा हूँ. यह यात्रा भारत-रूस रक्षा और सामरिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए बातचीत का अवसर देगी.” भारतीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ‘चीन के साथ सीमा पर तनाव के बावजूद रक्षा मंत्री ने रूस की यात्रा स्थगित नहीं की क्योंकि रूस के साथ भारत के दशकों पुराने सैन्य संबंध हैं.

चीन पर दवाब बनाने की कोशिश में भारत

अपने इस दौरे पर रक्षा मंत्री रूस के उच्च अधिकारियों के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने को लेकर कई बैठकें करने वाले हैं. भारतीय मीडिया में रक्षा मंत्री के इस दौरे को भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.  कहा जा रहा है कि राजनाथ सिंह चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत के हथियारों को पूरी तरह से कारगर बनाने और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए रूस गए हैं ताकि चीन को हड़काया जा सके.’

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भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रूस रवाना होने के बाद से ही एस-400 डिफ़ेंस सिस्टम की भी चर्चा हो रही है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ‘रूस ने इस डिफ़ेंस सिस्टम की डिलीवरी डेट आगे खिसका दी है जो भारत के लिए चिंता का विषय है.’ भारत सरकार रूस में बनने वाले ‘एस-400: लॉन्ग रेंज सरफ़ेस टू एयर मिसाइल सिस्टम’ को ख़रीदना चाहती है.

एस-400 डिफेंस सिस्टम सौदा

यह मिसाइल जमीन से हवा में मार कर सकती है. एस-400 को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफ़ेंस सिस्टम माना जाता है. इसमें कई ख़ूबियाँ हैं, जैसे- एस-400 एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है. भारतीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ‘रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत-रूस रक्षा साझेदारी से इतर, दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को ओर मजबूत करने का एक अवसर भी है.’

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