गरीबों के लिए 22 साल के इस खिलाड़ी ने इंग्लैंड के प्रधानमंत्री को हरा दिया

न्यूज पैंट्री डेस्क : पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कहर का सामना कर रही है. इसका सबसे बुरा असर गरीब और मजदूरों पर पड़ा है. विकसित देशों में गिना जाने वाला इंग्लैंड भी इससे अछूता नहीं है. यहां भी गरीबों के लिए खाने के लाले पड़ गए हैं. उनके हक के लिए मैंचेस्टर यूनाइटेड की ओर से खेलने वाले फ़ुटबॉलर मार्कस रैशफोर्ड ने अपने ही देश के प्रधानमंत्री को हरा दिया है.

मार्कस रैशफोर्ड को मैदान में अपने विरोधियों को हराने के लिए जाना जाता है लेकिन उन्होंने ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को न सिर्फ कड़ा मुकाबला दिया बल्कि उन्हें अपने फैसले को वापस लेने पर मजबूर भी कर दिया. उन्होंने अपने इस कारनाम से लोगों को अचंभित कर दिया है. खुद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने उनकी तारीफ की है.

सरकार ने बदला अपना फैसला

दरअसल ब्रिटेन की सरकार ने यह जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में खाना देने की योजना चलाई थी. सरकार ने इस योजना को बंद करने का फैसला कर लिया था. बस फिर क्या था, रैशफोर्ड ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ एक अभियान छेड़ दिया. आखिरकार सरकार झुक गई और इस योजना को आगे बढ़ाने पर राजी हो गई. अब गर्मियों की छुट्टियों में जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में भोजन दिया जाएगा.

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रैशफोर्ड ने सरकार पर दवाब बनाने के लिए #maketheUturn अभियान चलाया था. वो चाहते थे कि सरकार पहले से चली आ रही इस योजना को आगे भी जारी रखे. इस योजना को बंद करने की पहले ही घोषणा की जा चुकी थी. जैसे ही सरकार ने अपना फैसला वापस लिया, 22 साल के रैशफोर्ड ने ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, “मैं नहीं जानता कि मुझे क्या कहना है. हम एक साथ मिलकर क्या कर सकते हैं, हमें इस पर जोर देने की जरूरत है. यह 2020 का इंग्लैंड है.”

हफ्ते में 2.5 लाख डॉलर की कमाई

महज 22 साल के रैशफोर्ड दुनिया के सबसे मशहूर फुटबॉल क्लबों में से एक मैंचेस्टर यूनाइटेड के लिए खेलते हैं. क्लब के साथ करार के तहत रैशफोर्ड को एक हफ्ते में ढाई लाख डॉलर की कमाई होती है. उनका यह क़रार साल 2023 तक है लेकिन वो एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं. उनका कहना है कि स्कूल में मुफ़्त खाने की सुविधा गरीब बच्चों के लिए जीवन रेखा जैसी है. उनका बचपन गरीबी में बीता है.

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जब सरकार अपने फ़ैसले से पीछे हटी, उसके पहले सुबह रैशफ़ोर्ड ने एक ट्वीट किया था. उन्होंन लिखा था, “जब आप सुबह-सुबह फ़्रिज से दूध निकालने जाते हैं तो रूककर एक पल के लिए सोचिए कि पूरे देश में कम से कम दो लाख बच्चे ऐसे हैं, जिनकी दूध की शेल्फ़ खाली हैं.” इंग्लैंड में कम आमदनी वाले परिवारों के करीब 13 लाख बच्चे स्कूलों में मिलने वाले मुफ़्त खाने के हक़दार हैं.

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने की तारीफ

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आधिकारिक प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा है कि देशव्यापी लॉकडाउन “महामारी की वजह से पैदा हुई विशेष परिस्थितियों को दिखाता है.”

रैशफोर्ड पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “गरीबी को लेकर जो दलील उन्होंने दी प्रधानमंत्री उसका स्वागत करते हैं और इस बात का सम्मान करते हैं कि खेल जगत की एक प्रमुख शख्सियत के तौर पर अहम मुद्दों को उठाने में वो अपनी भूमिका निभा रहे हैं.”

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